क्युकी वो थे,इसलिए हम हैं।
क्युकी वो थे, इसलिए हम हैं
हमारे बीच रहते रहते
न जाने कब वो "पितर"हो जाते हैं
उनके आशीर्वाद से ही
हम सब अंत में "तर" जाते हैं।
नहीं कुछ मांगते हमसे
नहीं कुछ चाहते हमसे
हमारे ही साथ रहते हुए
न जाने कब वो "पितर"हो जाते हैं।
अपना आशीर्वाद हमे देकर
हमारा जीवन संवारकर
हमारे लिए कितना कुछ संजो कर
न जाने कब वो "पितर" हो जाते हैं।
सिर्फ यही पखवाड़ा होता है
जब वो हमसे मिलने आते हैं
अपने सानिध्य से हमारे दुःख,उनके
साथ ले जाते हैं
हमारे सुख दुख के साथी होते है
हमारे पथ प्रदर्शक होते हैं
न जाने कब स्वर्गपथ पर अग्रसर हो जाते हैं
हमारे बीच रहते हुए
न जाने कब वो "पितर"हो जाते हैं।
आओ कुछ समय उन्हे भी दें
जिन्होंने हमे जीवन दिया,जीना सिखाया
समाज में सर उठाकर रहना सिखाया।
उनके सत्कर्मों का अनुसरण करें,
जलांजलि, व पुष्पांजलि से उन्हें स्मरण करें
अन्नदान से उन्हें संतृप्त करें, क्युकी
वो थे इसलिए हम हैं
जो हमारे बीच रहते हुए
न जाने कब पितर हो जाते हैं।
🙏
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