दशहरा .... क्या कहता है?
दशहरा ,,,,,,सिर्फ एक त्योहार नही
सिखाता बहुत कुछ, यूँ ही जाता नहीं।
रावण मरण से जानिए, अहंकार का नाश।
रावण से ही सीखिए,शिव-उपासना का रहस्य खास।
धैर्य, अनुशासन, और मर्यादा की राह,
दिखाते हमे प्रभु श्री राम.
सतीत्व का मूल्य बताए वैदेही,
और बताए सतजीवन की राह।
देखिए विजया दशमी का चलन,
बनाते हैं मानव स्वयं ही रावण,
फिर स्वयं करते उसी रावण का दहन
इसी प्रथा से जीता मानव, उसका सम्पूर्ण जीवन।
नित्य प्रति मानव,मन के कोने में
उपजता दशानन का कोई न कोई रूप है।
स्वयं रचता मानव, स्वयं में ही
रावण का प्रतिरूप है।
क्यों नही करता दहन ,मानव
इस स्वरचित रावण को
क्यों पूर्ण नही करता
विजयादशमी के पर्व को।
सिखाएं अगली पीढ़ी को ये अवश्य ही
स्वयं में ही छिपा है स्वयं का रहस्य ही।
रावण भी तुम, राम भी तुम,
तुम पर ही निर्णय,किसे चयन करते हो तुम।
विजयादशमी की शुभकामनाएं।
रुचि
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