मेरी कविता
एक कविता मेरी, प्यारी सी
आखिर है क्या ये न्यारी सी,
मेरे शब्दों का तारतम्य,
या हृदयगत उधेड़बुन अदम्य,
या फिर अभिव्यक्ति मेरी सौम्य,
है ये न्यारी सी, कविता मेरी प्यारी सी।
अनकही मेरी बातों को
कह जाती ये सारी छिपी बातों को
झकझोर जाती मेरा अंतरंग, मेरे सपनो को,
है ये न्यारी सी,कविता मेरी प्यारी सी।
कभी बधाइयां देती, कभी शुभकामनाएं,
कभी अश्रुमय दिल से देती विदायें,
कभी प्रश्न पूछती, कभी सब सुलझा जाय
है ये न्यारी सी, कविता मेरी प्यारी सी।
मेरा अभिमान, मेरी पहचान
मेरी कविता से मिलता मुझे आराम
उम्मीद भरी सुबह और सुकून भरी शाम।
है ये न्यारी सी,कविता मेरी प्यारी सी।
R.A.J.
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