माँ
क्या लिखूं माँ तुम पर कविता
प्यार भरा आँचल लिखूं?
या लिखूं तुम्हारी ममता,
क्या लिखूं मैं माँ, तुम पर कविता।
कहते हैं तुमसे मिलते हैं ,
मेरे नैन-नक्श
शीशे में देखु खुद को,
दिखता है तुम्हारा अक्स
हर कदम पर साथ मेरे,
रहता है तुम्हारा साया,
तभी तो जीवन की उलझनों को
मैंने है सुलझाया,
बहुत याद आता है माँ,तुम्हारा
डांटना,समझाना और शाबासी देना
मुझपर अपनी ममता ऐसे ही निसार करना।
मातृ दिवस एक जरिया है,
ममता के अहसास को गहराने का,
कविता तो एक बहाना है माँ
तुम्हारी गोद मे फिर छिप जाने का।
जितना आकाश है अपरिमित,
तुम्हारी ममता उतनी ही है असीमित,
जग को जानना सिखाया,तुमने
क्या कभी तुमको जाना है हमने।
क्या लिखूं तुम पर कविता माँ।
प्यार भरा आँचल लिखूं,
या लिखूं तुम्हारी ममता।
रुचि
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