जय परशुराम
विप्रजन गर विप्रजन का हाथ थाम आगे बढ़े,
कोई कठिनाई क्या करे जब विप्रजन संगठन गढ़े।
मनचाहे रचना करे, जो मनचाहे, करे कोहराम,
नतमस्तक कर दे जग को,जिनको थामे "परशुराम".
कालचक्र का चक्र चला, अब चक्र हमारा चल जाय।
सब सम्भव हो जाय, जब विप्र सिंहासन हल जाय।
भगवा रंग का रंग जमे अब, यही कालचक्र का नारा है
अक्षय हो सारे सुख -सौहार्द, हमें "परशुराम"का सहारा है।
जय परशुराम
अक्षय तृतीया अक्षुण्ण हो।
रुचि🙏
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