पुस्तक
पुस्तक हमारी मित्र है।
ज्ञान रूपी शस्त्र है।
स्वयं का ज्ञान देती पुस्तक
अज्ञानी अंधेरे में प्रकाश है पुस्तक
संस्कार हीन को संस्कारित करती
अकेले हो तो साथ निभाती
लेखकों के शब्दो को संजोती है
पाठकों को सर्वस्व दिया करती है
शब्दों में छिपाकर सारी दुनिया
पुस्तक दिखाती सारी दुनिया
जो छप गए किताबों में
नही छिपे वो अंधेरों में
पुस्तक हमारी मित्र है
ज्ञान रूपी शस्त्र है।
रुचि ए. झा🙏
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